बचपन की परवरिश में हर दिन फैसले - कक्षा में बढ़ना, पाठशाला शुरू करना, परीक्षा की तैयारी। सूक्ष्म निर्णयों के ढेर में, पूरे परिवार की दिशा किसी का ध्यान नहीं रहती। पर बहुत दूर के एक बिंदु पर निशान लगा दें, तो पैर की अनिश्चितता कम हो जाती है। परिवार के निर्णय किसी एक की प्रवृत्ति से नहीं, साझे किए गए "चित्र" के अनुसार लें, तो संबंध टूटता नहीं।

