चालीस के दशक की एक सर्दी, उस व्यक्ति ने डायरी के आखिरी पन्ने पर एक लाइन लिख दी।
"इस साल, सीढ़ी के दो पड़ाव, बिना साँस लिए, चढ़ गया"।
कोई अर्थ नहीं, अपने सिवा।
दस साल बाद।
अब, उसी डायरी के पन्ने पर, दस लाइनें हैं।
दस लाइनें, सिर्फ रिकॉर्ड नहीं - शरीर के लिए एक नक़्शा।
जाँच के नंबर, शरीर की बात नहीं बताते
रक्त का दबाव, शक्कर, कोलेस्ट्रॉल।
जाँच के ये नतीजे सटीक हैं।
पर शरीर के बदलाव का सब कुछ नहीं बताते।

