रिश्ते जब जल्दबाज़ी से बनाते हो तो, हमेशा सस्ते रह जाते हैं।
नाम के काग़ज़, लोगों के ओहदे इकट्ठे करने में ध्यान रहता है, पर रिश्ते की गहराई खो जाती है।
आपात काल में लोग नहीं रहते।
किसी ने 20 के दशक में एक नियम बनाया - "साल में एक नया आदमी से सच में गहरा बात करूँगा"।
20 साल बाद, उसके पास ऐसे लोग रह गए, जिनके पास काम अलग है, उम्र अलग है, पर भरोसा समान है।
संख्या बढ़ाना, रिश्ते बनाना नहीं
नई जगह हर दिन नए लोग मिलते हैं।

