जाग जाते ही, दिमाग़ दौड़ने लगता है। आज का काम, कल की चिंता, भूली हुई बात। जानकारी लेने से पहले ही, विचार बिखर जाता है। इसी गड़बड़ी से पहले, 5 मिनट की आंखें बंद कर लो। जो विस्तार में ध्यान देता है, उसके लिए शुरुआत में ही व्यवस्था ज़रूरी है।
सुबह की ऊर्जा पहले से ही चल रही है
सो कर उठते ही, दिमाग़ पहले से चल चुका होता है। रात का सपना, आज की योजना, कल की अधूरी बातें - सब एक जैसे मिक्स हो जाते हैं। इसी अव्यवस्था में उठ जाओ, तब पूरा दिन अस्तव्यस्त ही रहता है। सुबह की ध्यान क्षमता कमज़ोर होती है, क्योंकि मन पहले से भरा हुआ है।

