सेवानिवृत्ति जब नज़दीक आती है, तब अचानक भविष्य ठोस हो जाता है। काम का अंत, ज़िंदगी का नया अध्याय। 60 के दशक में सब कुछ बदलना - इतनी शक्ति न बचेगी। तब 50 की उम्र में ही, धीरे-धीरे "अभ्यास" शुरू कर दें। सीखना नहीं, बल्कि अनुभव करना।
बदलाव अचानक आता है, तैयारी देर से होती है
कर्म जीवन में अचानक खत्म होता है। सुबह की यात्रा, दोपहर की बैठक, शाम की आदत - सब गायब। जब ये सब न रहे, तो नई दिनचर्या से जूझना पड़ता है। यह सोचना होता है कि दिन में क्या करूंगा, किससे मिलूंगा, क्या करूंगा।

