जिम्मेदारी वाले लोग सोचते हैं - अपने आप से यह काम निकल जाएगा। पर उसी "जल्दी" की कीमत, समय के साथ देनी पड़ती है। अकेले में निपटा लेना, एक व्यक्ति को सब कुछ पर क़ब्ज़ा रखना। जब वह व्यक्ति थक जाए, पूरा काम रुक जाता है। पर अगर 3 लोग मिलकर एक काम करें, तब टीम बची रहती है।
एक आदमी - पूरे का भार
अकेले में काम निभाने का सुख है - ज़िम्मेदारी और खुशी, दोनों आपके पास। पर साथ ही, सब कुछ आपके कंधे पर। आराम के दिन नहीं, जिम्मेदारी से मुक्त होने का भय। कुछ दिन ऐसे रहो, तो अंदर ख़ुद ही टूटने लगता है।

