बहुत गर्म पानी भी सही नहीं, बिल्कुल ठंडा भी नहीं - दोनों में नहाने के बाद कुछ अधूरा रह जाता है। नींद की बेलगामी या फिर सोने से पहले बेचैनी। किसी ने सिखाया हुआ "सही तापमान" अपने शरीर की मौजूदा ज़रूरत से ज्यादा मायने नहीं रखता। इसे जानने के लिए रोज़ थोड़ा-थोड़ा बदलकर देखना पड़ता है। पूरा सवाल सुलझाने की कोशिश न करके, बदलते हुए जवाब तक पहुंचना - यह आसान तरीका है।

